त्र्यंबकेश्वर मंदिर
त्र्यंबकेश्वर काल सर्प पूजा बुकिंग
पूजा में क्या-क्या होता है, कितना समय लगता है और क्या तैयारी रखें, आसान भाषा में।
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आम तौर पर इसी क्रम में होती है
पूजा नहाकर और संकल्प लेकर शुरू होती है। बहुत से लोग इसके लिए कुशावर्त कुंड जाते हैं।
सबसे पहले गणेश जी और नवग्रह की पूजा होती है, ताकि पूजा बिना रुकावट पूरी हो।
नाग देवता की पूजा होती है और परंपरा के अनुसार नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाया जाता है।
राहु-केतु से जुड़े मंत्र, जाप और हवन पंडित जी अपनी विधि से कराते हैं।
पूजा की सामग्री और चढ़ाई हुई चीज़ों का विधि के अनुसार विसर्जन किया जाता है।
आखिर में भगवान शिव का अभिषेक, आरती और आशीर्वाद होता है।
सीधा जवाब
समय पंडित जी की विधि, पूजा के तरीके और भीड़ पर निर्भर करता है। अलग-अलग जगह कुछ घंटे, मोटे तौर पर 3 से 6 घंटे, बताए जाते हैं। सबके लिए एक ही समय सही नहीं होता, इसलिए बुकिंग के समय पंडित जी से पूरा प्रोग्राम पूछ लें।
कुछ आसान सुझाव
विस्तार से, आसान भाषा में
पूजा से पहले नहाकर साफ़ कपड़े पहने जाते हैं। बहुत से लोग त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड में स्नान करते हैं। फिर पंडित जी आपका नाम, गोत्र और पूजा का मकसद बोलकर संकल्प कराते हैं।
किसी भी पूजा की शुरुआत गणेश जी से होती है। उसके बाद नवग्रह की पूजा होती है, क्योंकि काल सर्प योग राहु-केतु और बाकी ग्रहों की स्थिति से जुड़ा माना जाता है।
नाग प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। फिर फूल, बेलपत्र, काले तिल और बाकी चीज़ें चढ़ाई जाती हैं। परंपरा के अनुसार नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाया जाता है।
राहु और केतु के मंत्रों का जाप होता है। जाप कितनी बार हो, यह पंडित जी की परंपरा और पूजा के तरीके पर निर्भर करता है।
हवन में घी और हवन सामग्री की आहुति दी जाती है। इस दौरान आपको भी पंडित जी के कहे अनुसार आहुति देनी होती है।
पूजा की चीज़ों का विधि के अनुसार विसर्जन होता है। आखिर में शिव जी का अभिषेक, आरती और आशीर्वाद होता है।
पंडित जी की परंपरा के हिसाब से अलग भी हो सकते हैं
राहु का बीज मंत्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
केतु का बीज मंत्र: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
पूजा में शिव जी के मंत्र, जैसे महामृत्युंजय मंत्र, भी बोले जाते हैं। पूजा के दौरान मंत्र पंडित जी बोलते हैं। आपको सिर्फ़ संकल्प और आहुति के समय उनके कहे अनुसार करना होता है।
आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली चीज़ें
ज़्यादातर मामलों में सामग्री का इंतज़ाम पंडित जी खुद करते हैं। इसलिए अपनी तरफ़ से खरीदने से पहले पूछ लें कि क्या लाना है और क्या खर्च में शामिल है।
पूजा में आपकी भूमिका
आप पूजा में यजमान की तरह बैठते हैं। पंडित जी जो कहें, वही करें।
छोटी बातें जो काम आती हैं
ये आम सुझाव हैं। आपके लिए जो खास हो, वह पंडित जी से पूछिए।
इसमें घबराने की बात नहीं
त्र्यंबकेश्वर में कई परिवार पीढ़ियों से पूजा कराते आए हैं और सबकी अपनी परंपरा है। इसलिए क्रम, मंत्र और जाप की गिनती में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।
इसलिए नेट पर पढ़ी किसी एक लिस्ट को आखिरी सच मत मानिए। पंडित जी से पूजा शुरू होने से पहले एक बार पूछ लें कि वे किस क्रम से पूजा कराएंगे।
जो बातें लोग बुकिंग से पहले सबसे ज़्यादा पूछते हैं
आम तौर पर स्नान-संकल्प, गणेश-नवग्रह पूजा, नाग देवता की पूजा, राहु-केतु के मंत्र और हवन, विसर्जन और शिव अभिषेक जैसे चरण होते हैं। क्रम पंडित जी के हिसाब से बदल सकता है।
इस बारे में परंपराएं अलग हैं। अपनी स्थिति बताकर पंडित जी से ही पूछ लें।
आम तौर पर साफ़ और सादे कपड़े ठीक रहते हैं। कोई खास नियम हो तो पंडित जी पहले बता देते हैं।
राहु और केतु के बीज मंत्र, नाग देवता के मंत्र और शिव जी के मंत्र बोले जाते हैं। कौन से और कितनी बार, यह पंडित जी की परंपरा और पूजा के तरीके पर निर्भर करता है।
कुछ परंपराओं में हल्का व्रत बताया जाता है। अगर आपको कोई बीमारी है या आप दवा लेते हैं, तो अपनी सेहत की अनदेखी न करें और पंडित जी से आसान तरीका पूछ लें।
ज़रूरी नहीं। जिनके नाम पर पूजा होनी है, उनका शामिल होना अच्छा माना जाता है। बाकी परिवार आ सके तो ठीक है। पंडित जी से पूछ लें।
ज़्यादातर पंडित जी खुद इंतज़ाम करते हैं। बुकिंग से पहले पूछ लें कि आपको कुछ लाना है या नहीं।
पंडित जी जो बताएं वही करें। आम तौर पर लोग मंदिर दर्शन करते हैं और ज़रूरत के हिसाब से दान या ब्राह्मण भोजन कराते हैं।
अपनी तारीख बताइए, पंडित जी से सीधे बात हो जाएगी।
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